2025 में कॉपर की ऐतिहासिक तेजी: वजहें, भविष्य और निवेश के विकल्प

2025 अब तक का एक असाधारण साल साबित हुआ है, खासकर कमोडिटी मार्केट के लिए। सोना, चांदी और कॉपर—तीनों ने निवेशकों को चौंकाने वाले रिटर्न दिए हैं। जहां चांदी लगभग 167% और सोना करीब 74% बढ़ा, वहीं कॉपर ने भी लगभग 50% की शानदार तेजी दिखाई।

भले ही यह तेजी सोने और चांदी के मुकाबले कम लगे, लेकिन पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो कॉपर के लिए 2025 सबसे बेहतरीन वर्षों में से एक रहा है।

इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे:

  • 2025 में कॉपर की कीमतों में अचानक तेजी क्यों आई
  • क्या यह तेजी आगे भी बनी रह सकती है
  • कॉपर का लॉन्ग-टर्म डिमांड-सप्लाई आउटलुक
  • कॉपर में निवेश के विकल्प और उनसे जुड़े जोखिम

2025 में कॉपर की शॉर्ट-टर्म तेजी: असली वजह क्या है?

अगर 2025 के प्राइस मूवमेंट को ध्यान से देखें, तो जनवरी से जुलाई तक कॉपर की कीमतों में कोई खास हलचल नहीं थी। बाजार लगभग फ्लैट रहा।
लेकिन अगस्त के बाद सितंबर से दिसंबर के बीच कॉपर में लगभग 45% की तेज़ रैली देखने को मिली। यानी पूरे साल की तेजी का बड़ा हिस्सा सिर्फ चार-पांच महीनों में आया।

आखिर अगस्त के बाद ऐसा क्या हुआ?

इस तेजी की सबसे बड़ी वजह है —

AI (Artificial Intelligence) और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग


AI और डेटा सेंटर्स कैसे बढ़ा रहे हैं कॉपर की मांग?

1. AI रैक्स और पावर सप्लाई

AI डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होने वाले AI रैक्स को बहुत अधिक बिजली की जरूरत होती है—लगभग 1400 एम्पियर तक।
सामान्य कॉपर वायर इतनी हाई पावर को संभाल नहीं पाते, इसलिए यहां कॉपर बस-बार (Copper Bus Bars) का इस्तेमाल होता है।

  • एक AI रैक में औसतन 115 किलोग्राम कॉपर लगता है
  • केवल पावर सप्लाई के लिए अनुमानित मांग: 74,000 टन कॉपर

2. कूलिंग सिस्टम और पाइपिंग

AI रैक्स अत्यधिक गर्मी पैदा करते हैं, इसलिए इन्हें ठंडा रखने के लिए कूलेंट सिस्टम लगाए जाते हैं।
इन कूलेंट्स को ले जाने वाली पाइपिंग में भारी मात्रा में कॉपर इस्तेमाल होता है।

  • कूलिंग पाइप्स से अनुमानित कॉपर डिमांड: 2.84 मिलियन टन

3. इलेक्ट्रिकल ग्रिड और ट्रांसफॉर्मर्स

डेटा सेंटर्स को सपोर्ट करने के लिए नए ग्रिड्स और ट्रांसफॉर्मर्स लगाए जा रहे हैं, जिनमें कॉपर का भारी उपयोग होता है।

  • ट्रांसफॉर्मर्स से अतिरिक्त मांग: 3,60,000 टन

कुल मिलाकर

AI और डेटा सेंटर्स से जुड़ी कुल अतिरिक्त कॉपर मांग लगभग

3.1 मिलियन टन आंकी जा रही है।

जब इतनी बड़ी मांग अचानक आती है और सप्लाई स्थिर रहती है, तो कीमतों का बढ़ना स्वाभाविक है।


शॉर्ट-टर्म में जोखिम भी है

AI और डेटा सेंटर्स फिलहाल कॉपर की तेजी का बड़ा कारण हैं, लेकिन यहीं एक जोखिम भी छिपा है।
अगर भविष्य में:

  • AI सेक्टर में स्लोडाउन आता है
  • डेटा सेंटर्स की ग्रोथ धीमी होती है

तो शॉर्ट-टर्म में कॉपर की कीमतों में करेक्शन संभव है।


कॉपर का लॉन्ग-टर्म प्रदर्शन: इतिहास क्या कहता है?

पिछले 10 वर्षों में कॉपर ने उतार-चढ़ाव जरूर दिखाए हैं।
कुछ सालों में निगेटिव या फ्लैट रिटर्न भी रहे, लेकिन अगर कोई निवेशक 2015 से 2025 तक कॉपर में बना रहा होता, तो उसे औसतन:

10.6% सालाना (CAGR) रिटर्न मिला होता।

हालांकि, 2025 की 50% तेजी पिछले एक दशक में सबसे असाधारण रही है।


भविष्य की कहानी: डिमांड बनाम सप्लाई

1. कॉपर की ग्लोबल डिमांड

  • 2025 में अनुमानित मांग: 28 मिलियन मीट्रिक टन
  • 2040 तक अनुमानित मांग: 42 मिलियन मीट्रिक टन

👉 यानी लगभग 50% की बढ़ोतरी, या
👉 14 मिलियन मीट्रिक टन अतिरिक्त मांग

यह नई मांग कहां से आएगी?

चार प्रमुख स्तंभ हैं:

  1. कोर इकोनॉमिक एक्टिविटीज
    • कंस्ट्रक्शन
    • इलेक्ट्रॉनिक्स
    • कूलिंग सिस्टम
    • घरेलू उपकरण
  2. एनर्जी ट्रांजिशन और इलेक्ट्रिफिकेशन (सबसे बड़ा फैक्टर)
    • ग्रिड्स
    • ट्रांसफॉर्मर्स
    • सब-स्टेशंस
  3. AI और डेटा सेंटर्स
    • लगभग 10% अतिरिक्त मांग
  4. डिफेंस सेक्टर
    • लगभग 4% मांग

सबसे ज्यादा मांग किस देश से आएगी?

इस अतिरिक्त 14 मिलियन टन डिमांड में:

  • चीन अकेले 4.8 मिलियन टन
  • एशिया (चीन को छोड़कर): 3.5 मिलियन टन
  • यूरोप, अमेरिका और अन्य क्षेत्र बाकी हिस्सा

चीन पहले से ही:

  • दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उपभोक्ता है
  • कॉपर ओर का सबसे बड़ा इंपोर्टर और स्मेल्टर है

यही कारण है कि चीन की आर्थिक स्थिति कॉपर की कीमतों पर सीधा असर डालती है
अगर चीन की ग्रोथ धीमी पड़ती है, तो यह एक बड़ा जोखिम बन सकता है।


सप्लाई साइड की सच्चाई: असली समस्या

2025 में कॉपर की सप्लाई लगभग 27 मिलियन मीट्रिक टन है।
लेकिन 2040 तक:

डिमांड और सप्लाई के बीच लगभग 10 मिलियन टन का गैप बनने का अनुमान है।

सप्लाई क्यों घट रही है?

  • चिली, पेरू और लैटिन अमेरिका की कॉपर माइंस बहुत पुरानी हो चुकी हैं
  • इन माइंस में अब कॉपर का ग्रेड (क्वालिटी) लगातार गिर रहा है
  • नई माइंस शुरू होने में औसतन 17 साल लग जाते हैं

👉 यानी सप्लाई जल्दी बढ़ पाना लगभग असंभव है।


लॉन्ग-टर्म आउटलुक: बुलिश क्यों है?

  • डिमांड लगातार बढ़ रही है
  • सप्लाई सीमित होती जा रही है
  • नई माइंस आने में बहुत समय लगता है

इसलिए लॉन्ग-टर्म में कॉपर के दामों पर दबाव ऊपर की ओर रहने की संभावना है
हालांकि, शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव और करेक्शन पूरी तरह संभव हैं।


कॉपर में निवेश के विकल्प

1. भारत में कॉपर ETF

  • फिलहाल भारत में कोई भी लिस्टेड कॉपर ETF उपलब्ध नहीं है

2. कॉपर फ्यूचर्स (MCX)

  • हाई रिस्क
  • लेवरेज और वोलैटिलिटी ज्यादा
  • सभी निवेशकों के लिए उपयुक्त नहीं

3. कॉपर प्रोड्यूस करने वाली कंपनियों के शेयर

  • केवल कॉपर की कीमत पर दांव लगाना काफी नहीं
  • कंपनी का मैनेजमेंट, कर्ज, वैल्यूएशन भी मायने रखते हैं
  • बिना रिसर्च निवेश करना जोखिमभरा हो सकता है

4. ग्लोबल कॉपर ETFs

दो प्रकार के विकल्प मिलते हैं:

(a) माइनिंग कंपनियों में निवेश करने वाले ETFs

  • iShares Copper & Metals Mining ETF (ICOP)
  • Sprott Junior Copper Miners ETF (COPJ)
  • Global X Copper Miners ETF (COPX)

(b) कॉपर फ्यूचर्स आधारित ETFs

  • United States Copper Index Fund (CPER)
  • ये फ्यूचर्स में निवेश करते हैं और ज्यादा वोलैटाइल होते हैं

निष्कर्ष

  • 2025 में कॉपर की तेजी का बड़ा कारण AI और डेटा सेंटर्स हैं
  • लॉन्ग-टर्म में डिमांड-सप्लाई गैप कॉपर के पक्ष में जाता दिखता है
  • शॉर्ट-टर्म में करेक्शन संभव है, लॉन्ग-टर्म आउटलुक मजबूत है
  • निवेश से पहले अपने रिस्क प्रोफाइल और रिसर्च को प्राथमिकता दें

कॉपर एक स्ट्रैटेजिक मेटल बन चुका है, और आने वाले दशकों में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है।