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शेयर बाजार में 440 वोल्ट का झटका: सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, जानिए क्या है वजह

शेयर बाजार में 440 वोल्ट का झटका: सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, जानिए क्या है वजह

Last Updated on February 20, 2026 0:10, AM by Pawan

आज शेयर बाजार में निवेशकों को जोरदार झटका लगा। दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा और बाजार एकतरफा गिरावट के साथ बंद हुआ। लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे और निवेशकों के पोर्टफोलियो में भारी गिरावट देखने को मिली।

बाजार का हाल: चारों तरफ लाल निशान

अगर प्रमुख सूचकांकों की बात करें तो

  • BSE Sensex करीब 1.5% टूट गया।
  • NIFTY 50 भी लगभग 1.5% फिसल गया और इंट्राडे में 350–400 अंकों तक लुढ़क गया।

गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही।

  • लार्ज कैप,
  • मिड कैप,
  • स्मॉल कैप,
  • यहां तक कि माइक्रो कैप शेयरों में भी 1.5% से 2% या उससे अधिक की कमजोरी दर्ज की गई।

सेक्टर वाइज देखें तो ऑटो, आईटी, बैंकिंग (सरकारी और निजी), एफएमसीजी, मेटल, फार्मा, रियल एस्टेट, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल—लगभग हर सेक्टर में बिकवाली हावी रही।


गिरावट की दो बड़ी वजहें

आज की गिरावट को दो हिस्सों में समझा जा सकता है—

  1. बाजार खुलने से पहले मौजूद नकारात्मक संकेत
  2. बाजार के दौरान आई बड़ी भू-राजनीतिक खबर

भाग 1: फेड के सख्त रुख और महंगे क्रूड का असर

1. फेड के मिनट्स से बढ़ी चिंता

अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve (फेड) के ताजा मिनट्स में सख्त रुख (Hawkish stance) देखने को मिला। संकेत मिले कि ब्याज दरों में जल्द कटौती आसान नहीं होगी। यहां तक कि जरूरत पड़ने पर दरें बढ़ाने का विकल्प भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया।

इसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा। अमेरिकी बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कमजोर हुआ।

2. रूस-यूक्रेन तनाव और क्रूड ऑयल

रूस-यूक्रेन के बीच शांति वार्ता में ठोस प्रगति नहीं हुई।

  • Russia और
  • Ukraine

के बीच जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। क्रूड लगभग 3% उछलकर 69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया और बाद में 71 डॉलर के पार चला गया।

भारत जैसे देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करते हैं। महंगा क्रूड मतलब:

  • बढ़ता ट्रेड डेफिसिट
  • महंगाई पर दबाव
  • रुपये पर असर
  • बाजार में विदेशी निवेशकों की सतर्कता

3. घरेलू महंगाई का दबाव

हालिया महंगाई आंकड़े भी उम्मीद से अधिक रहे, जिससे लिक्विडिटी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी। पहले से ही कमजोर सेंटीमेंट के बीच ये कारक बाजार पर दबाव बनाए हुए थे।


भाग 2: अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई घबराहट

बाजार में असली घबराहट उस समय बढ़ी जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई।

  • United States
  • Iran

के बीच सैन्य टकराव की आशंका तेज हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य तैयारियां तेज हैं और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

यहां तक कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के संभावित फैसले को लेकर भी चर्चाएं तेज रहीं। अगर हालात बिगड़ते हैं, तो मध्य-पूर्व में बड़ा संघर्ष छिड़ सकता है।

इसका भारत पर क्या असर?

यदि अमेरिका-ईरान टकराव बढ़ता है, तो:

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है (75 डॉलर या उससे ऊपर)
  • भारत का आयात बिल बढ़ेगा
  • महंगाई और चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हो सकती है

इसी आशंका ने बाजार में डर का माहौल बना दिया।


वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी

सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि:

  • अमेरिकी फ्यूचर्स,
  • यूरोपीय बाजार,
  • जर्मनी का DAX,
  • फ्रांस और अन्य प्रमुख सूचकांक

भी दबाव में नजर आए। यानी गिरावट एक ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा रही, लेकिन भारत में पहले से कमजोर सेंटीमेंट के कारण असर ज्यादा दिखाई दिया।


निष्कर्ष: आगे क्या?

आज की गिरावट केवल एक तकनीकी करेक्शन नहीं थी, बल्कि यह कई नकारात्मक संकेतों का संयुक्त असर था:

  • फेड का सख्त रुख
  • रूस-यूक्रेन युद्ध की अनिश्चितता
  • महंगा होता कच्चा तेल
  • अमेरिका-ईरान तनाव
  • घरेलू महंगाई का दबाव

बाजार फिलहाल भू-राजनीतिक घटनाओं और क्रूड ऑयल की चाल पर नजर रखेगा। जब तक इन मोर्चों पर स्पष्टता नहीं आती, उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

निवेशकों के लिए इस समय घबराने की बजाय जोखिम प्रबंधन, एसेट एलोकेशन और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना ज्यादा समझदारी होगी।

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