AI का बूम का IT को नहीं मिलेगा ज्यादा फायदा? एक्सपर्ट बोले- इन सेक्टर में छिपे हैं में कमाई के असली मौके
Last Updated on February 19, 2026 23:51, PM by Pawan
AI Related Sectors: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की तेजी से दुनिया भर में निवेश बढ़ रहा है। लेकिन Manulife Investment Management के सीनियर पोर्टफोलियो मैनेजर राणा गुप्ता का मानना है कि इस दौड़ के सबसे बड़े फायदे सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर्स को नहीं, बल्कि उन कंपनियों को मिल सकते हैं जो AI को चलाने का बुनियादी ढांचा तैयार कर रही हैं।
राणा गुप्ता का कहना है कि निवेशक अभी IT सर्विस कंपनियों पर जरूरत से ज्यादा फोकस कर रहे हैं। लेकिन, असली मौका डेटा सेंटर और हाइपरस्केलर विस्तार को सपोर्ट करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर में है।
पहले बिजली और मशीनें, बाद में सॉफ्टवेयर
गुप्ता बताते हैं कि ग्लोबल टेक कंपनियां AI रेस जीतने के लिए सैकड़ों अरब डॉलर का कैपेक्स कर रही हैं। यह पैसा सीधे सॉफ्टवेयर कंपनियों के पास नहीं जाता। सबसे पहले यह खर्च बिजली, पावर सिस्टम, इक्विपमेंट और मेटल्स जैसे सेक्टर में जाता है।
उन्होंने साफ कहा, ‘टेक कंपनियों को AI के लिए पावर चाहिए… और पावर सिस्टम्स और मेटल्स में कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं।’ यानी AI का विस्तार बिजली और भारी उपकरणों पर निर्भर है।
डेटा सेंटर के साथ बढ़ेगी सहायक उद्योगों की मांग
जैसे जैसे हाइपरस्केलर अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं, डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ रही है। डेटा सेंटर चलाने के लिए स्विचगियर, बैकअप जनरेटर, केबल और कूलिंग सिस्टम जरूरी होते हैं। AI वर्कलोड बहुत ज्यादा बिजली खपत करते हैं और उन्हें लगातार बिना रुके चलाना होता है। साथ ही तापमान नियंत्रण भी बेहद अहम है।
गुप्ता के मुताबिक, इन सहायक उद्योगों को लंबे समय तक ऑर्डर और कमाई की स्थिरता मिल सकती है, क्योंकि AI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और डेटा सेंटर 24 घंटे चलते हैं।
सेमीकंडक्टर नहीं, पर पावर इक्विपमेंट में मौका
भारत भले ही बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर या मेमोरी चिप का निर्माण नहीं करता, लेकिन इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और इंजीनियरिंग सप्लाई चेन में उसकी मजबूत मौजूदगी है। गुप्ता को खास तौर पर पावर इक्विपमेंट, जनरेटर और HVAC यानी हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम में मौके दिखते हैं।
डेटा सेंटर निर्माण की रफ्तार बढ़ने से इन क्षेत्रों में मांग तेज हो सकती है। उनका मानना है कि AI का दौर सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि एक इंडस्ट्रियल इनवेस्टमेंट साइकल जैसा भी दिखेगा।
IT सर्विस सेक्टर पर नजरिया बदलने की जरूरत
गुप्ता का कहना है कि अब IT सर्विस कंपनियों को AI खर्च का अकेला लाभार्थी मानना सही नहीं होगा। टेक कंपनियां एक बड़े इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। असली बहुवर्षीय और स्थिर ऑर्डर फ्लो उन कंपनियों को मिल सकता है जो सीधे कैपेक्स खर्च से जुड़ी हैं, जैसे पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां।
घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर भी सकारात्मक संकेत
AI थीम के अलावा गुप्ता भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी आशावादी हैं। उनका कहना है कि कॉरपोरेट कमाई में सुधार दिखने लगा है और क्रेडिट ग्रोथ भी बढ़ रही है। BSE-500 कंपनियों का मुनाफा लगभग 11 से 12 प्रतिशत बढ़ा है, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है।
वित्तीय क्षेत्र में वे खास तौर पर उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों को पसंद करते हैं जो छोटे और मझोले कारोबारों को कर्ज देते हैं। उन्होंने कहा, ‘क्रेडिट ग्रोथ के भीतर हम SME क्रेडिट को लेकर सबसे ज्यादा आशावादी हैं।’
निजी निवेश में वापसी के संकेत
गुप्ता के मुताबिक लंबे समय की सुस्ती के बाद निजी क्षेत्र का निवेश फिर से बढ़ने के संकेत दे रहा है। कंपनियां अब डेटा सेंटर, रियल एस्टेट और मेटल्स में नए निवेश की बात कर रही हैं। साथ ही सरकार का रक्षा खर्च भी बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘डेढ़ साल बाद पहली बार कंपनियों ने अर्निंग कॉल में कैपेक्स को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।’
कमर्शियल व्हीकल सेक्टर में भी सुधार
निजी निवेश और निर्माण गतिविधियों में तेजी का असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी दिख रहा है। दो साल की सुस्ती के बाद कमर्शियल व्हीकल की मांग में सुधार आ रहा है। इससे वाहन निर्माता और फाइनेंस कंपनियों दोनों को फायदा मिल सकता है।
गुप्ता का कहना है, ‘दो साल की सुस्ती के बाद कमर्शियल व्हीकल सेक्टर में आगे अच्छा रनवे दिख रहा है।’ उनके मुताबिक AI की कहानी सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। यह बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग, फाइनेंस और ट्रांसपोर्ट जैसे कई क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाने वाली व्यापक निवेश लहर बन सकती है।
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