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Mutual Funds Tax Rules: निवेश से पहले जान लें ये नियम, वरना मुनाफे पर लगेगा झटका

Mutual Funds Tax Rules: निवेश से पहले जान लें ये नियम, वरना मुनाफे पर लगेगा झटका

Last Updated on February 19, 2026 22:14, PM by Pawan

म्यूचुअल फंड्स में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। लोग अब बैंक एफडी में पैसे रखने की जगह सिप के जरिए म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में निवेश कर रहे है। लेकिन, कई इनवेस्टर्स म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के नियमों के बारे में ठीक तरह से नहीं जानते। इसका सीधा असर उनके रिटर्न पर पड़ता है। म्यूचुअल फंड की अलग-अलग स्कीमों के टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। इनवेस्टर्स को म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश करने से पहले टैक्स के नियमों के बारे में ठीक तरह से जानना जरूरी है।

पिछले कुछ सालों में टैक्स के नियमों में बदलाव

पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के नियमों में बदलाव आया है। इक्विटी फंड, डेट फंड, हाइब्रिड स्कीम, ELSS और REIT/InvITs के टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। डेलॉयट इंडिया के पार्टनर राजेश गांधी ने कहा, “इंडिया में म्चूचुअल फंड के टैक्स के नियम तीन चीजों पर निर्भर करते हैं। इनमें इनवेस्टर का टाइप (रेजिडेंट इंडिविजुअल/HUF, नॉन-रेजिडेंट या डोमेस्टिक कंपनी), स्कीम के पोर्टफोलियो का कंपोजिशन (इक्विटी, डेट या दूसरे एसेट्स) और इनवेस्टमेंट का होल्डिंग पीरियड शामिल हैं।”

 

इक्विटी ऐलोकेशन के आधार पर टैक्स के नियम

उन्होंने कहा कि इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, गोल्ड या इंटरनेशनल फंड में निवेश करने वाले इनवेस्टर्स को पहले स्कीम के एसेट ऐलोकेशन पर गौर करना जरूरी है। इसकी वजह यह है कि टैक्स के नियम इस पर निर्भर है कि किस स्कीम का कितना निवेश किसी तरह के एसेट में है। म्यूचुअल फंड की कुछ स्कीम के टैक्स के नियम दूसरी स्कीम के टैक्स के नियमों के मुकाबले आसान हैं।

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के नियम

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स और इक्विटी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में कम से कम 65 फीसदी इनवेस्ट करते हैं। इन फंड्स में 12 महीने से ज्यादा के निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) के नियम लागू होते हैं। एलटीसीजी पर 12.5 फीसदी के रेट से टैक्स लगता है। लेकिन, एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का एलटीसीजी टैक्स-फ्री है। 12 महीनों से कम के निवेश पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस (STCG) लागू होता है। इस पर 20 फीसदी रेट से टैक्स लगता है। 31 जनवरी, 2028 को या इससे पहले किए गए इनवेस्टमेंट पर ग्रैंडफादरिंग बेनेफिट्स मिलता है। ऐसे मामलों में उस तारीख तक के गेंस पर टैक्स नहीं लगता है।

ELSS के टैक्स के नियम

इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) का मतलब म्यूचुअल फंड की ऐसी स्कीम से है, जिसमें निवेश करने पर टैक्स-बेनेफिट मिलता है। इनकम टैक्स की ओल्ड स्कीम का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स ईएलएसएस में निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसके टैक्स के नियम भी इक्विटी स्कीम की तरह है। 12 महीने के बाद बेचने पर एलटीसीजी लागू होता है। 12 महीने से पहले बेचने पर एसटीसीजी लागू होता है। एक बड़ा फर्क यह है कि ELSS में 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इसका मतलब है कि निवेश करने के तीन साल बाद ही इनवेस्टर अपना पैसा निकाल सकते हैं।

डेट म्यूचुअल फंड के टैक्स के नियम

डेट म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के नियम अलग हैं। 1 अप्रैल, 2023 को या इसके बाद डेट फंड्स में निवेश करने पर टैक्स के अलग नियम लागू होते हैं। 1 अप्रैल, 2023 से पहले डेट फंड्स में निवेश पर टैक्स के अलग नियम लागू होते है। 1 अप्रैल, 2023 को या इसके बाद किए गए निवेश पर हुए कैपिटल गेंस को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस माना जाता है। इस पर इनवेस्टर के इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यूनिट्स 12 महीनों से पहले बेची गई हैं या 12 महीनों के बाद।

1 अप्रैल, 2023 से पहले डेट फंड में किए गए निवेश पर एलटीसीजी और एसटीसीजी के नियम लागू होते हैं। 12 महीनों के बाद पैसे निकालने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के नियम लागू होते हैं, जिस पर 12.5 फीसदी रेट से टैक्स लगता है। 12 महीनों से पहले बेचने पर एसटीसीजी लागू होता है, जिसे पर इनवेस्टर के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।

हाइब्रिड फंड्स के टैक्स के नियम

हाइब्रिड फंड्स पर उनके इक्विटी ऐलोकशन के हिसाब से टैक्स के नियम लागू होते हैं। अगर हाइब्रिड फंड ने इक्विटी (शेयरों) में 65 फीसदी या ज्यादा निवेश किया है तो उस पर इक्विटी फंड के टैक्स के नियम लागू होंगे। इक्विटी में 35 फीसदी से कम ऐलोकेशन होने पर डेट फंड के टैक्स के नियम लागू होंगे। ऐसे फंड्स स्पेसिफायड म्यूचुअल फंड्स के तहत आते हैं। इक्विटी में 35 से 65 फीसदी ऐलोकेशन होने पर एलटीसीजी पर 12.5 फीसदी के रेट से टैक्स लगता है, जबकि एसटीसीजी पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है।

गोल्ड ईटीएफ, इंटरनेशनल फंड्स और FoF के टैक्स के नियम

गोल्ड ईटीएफ, सिल्वर ईटीएफ, इंटरनेशनल फंड्स और ज्यादातर फंड फंड ऑफ फंड्स जो शेयरों में 65 फीसदी से कम इनवेस्ट करते हैं, उनके एलटीसीजी पर 12.5 फीसदी और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस (STCG) पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है।

गांधी ने कहा कि अगर लिस्टेड शेयरों में निवेश 65 फीसदी से ज्यादा है तो टैक्स के नियम इक्विटी फंड जैसे होंगे। इसका मतलब है कि लॉन्ग टर्म गेंस पर 12.5 फीसदी रेट से टैक्स लगेगा। शॉर्ट टर्म गेंस पर टैक्स का रेट 20 फीसदी होगा। एलटीसीजी एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा होने पर ही टैक्स लगेगा।

उन्होंने कहा कि अगर स्कीम डेट/मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में 65 फीसदी से ज्यादा इनवेस्ट करती है या ऐसे दूसरे फंड में 65 फीसदी या ज्यादा निवेश करती है जो खुद 65 फीसदी या इससे ज्यादा निवेश डेट में करता है तो वह स्कीम स्पेशिफायड म्यूचुअल फंड के तहत आएगी। ऐसे मामले में गेंस को शॉर्ट टर्म गेंस माना जाता है और उस पर टैक्स के तय रेट/स्लैब रेट से टैक्स लगता है। ऐसे मामलों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के बेनेफिट्स नहीं मिलते हैं।

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