इलाज के खर्चे के लिए मेडिकल लोन ले या हेल्थ इंश्योरेंस

इलाज के खर्चे की भरपाई कैसे करें : आज के समय मे अस्पताल में इलाज करवाना बहुत ही महंगा होता जा रहा है। इलाज कराने का खर्चा बढ़ता ही जा रहा है। अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को अस्पताल में भर्ती होना पड़े, तो खर्चा ओर ज्यादा बड़ जाता है। ऐसे उदाहरणों की कोई कमी नहीं है जहाँ अस्पताल के बिल ने परिवार की आर्थिक स्तिथि खराब कर दी हो। ऐसे में आप ओर क्या कर सकते हैं? पर आज हम आपको दो विकल्पों के बारे में बता रहे है। जिनमे से पहला है, हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) और मेडिकल लोन।

पर दोनों में ही कुछ अच्छी बाते है तो कुछ बुरी बातें। तो आइए देखते हैं आपके लिए कौनसा विकल्प बेहतर होगा।

हेल्थ इंश्योरेंस के फायदे ओर नुकसान

हेल्थ इन्श्योरेंस में आप हर साल कुछ प्रीमियम देते हो। और अगर आपको कोई गम्भीर बीमारी हो, ओर आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़े हैं, तो बीमा कंपनी आपके इलाज का खर्चा उठाती है। ओर अगर आपने इलाज के खर्चे के लियड क्लेम नहीं किया, तो प्रीमियम वापिस नहीं दिया जाता है। अब हम हेल्थ इंश्योरेंस की परेशानियों के बारे में जानते है।

1. हेल्थ इन्श्योरेंस में आप सालो तक प्रीमियम का भुगतान करते रहते हैं। ओर ऐसा हो सकता है की कई वर्षो तक आपको कोई गम्भीर बीमारी ना हो और क्लेम ना करना पड़े। तब आपको महसूस होगा कि आपका इतने वर्षों तक भरा गया प्रीमियम बेकार हो गया।

2. बीमा कम्पनियो द्वारा हर साल प्रीमियम बढ़ा दिया जाता है। कई बार प्रीमियम एक वर्ष में 30-40% तक भी बड़ा दिया जाता है। अगर किसी वजह आप प्रीमियम नहीं दे पाए, तो आपकी पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी, ओर जो पुराने प्रीमियम आपने भरे है, उनका कोई मतलब नही रह जायेगा। और अगर आपने कभी क्लेम भी नहीं किया, तो सारा पुराना प्रीमियम भी बेकार चला जाएगा।

3. इंश्योरेंस कंपनी पर ज्यादातर लोग भरोसा नही कर पाते है। क्योकी कई लोगो का मानना है कि अगर आपने कई वर्षों तक प्रीमियम का भुगतान किया, ओर जब क्लेम की बारी आई, तो कोई फालतू सा कारण बताकर क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाए तो। कई बार ऐसी परिस्थिति भी बन जाती है।

4. कई इंशोयरेंस कंपनीया गड़बड़ भी करती हैं। आपके पास सस्ता इंश्योरेंस प्लान है, तो वह उसे बंद करके आपको कोई नया महंगा प्लान खरीदने के लिए दबाव भी बनाती है।

5. बुजुर्ग लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने में परेशानी रहती है। अगर आपको पहले से ही कोई बीमारी (pre-existing illness) है, तो आपको स्वास्थ्य बीमा मिलने में भी परेशानी होगी। बीमा कंपनी आपकी एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देगी या फिर आपका प्रीमियम बहुत अधिक महंगा रखेगी।

6. बीमा कम्पनिया अस्पताल के सभी खर्चो का भुगतान नही करती है। उनका भुगतान आपको अपनी जेब से ही करना होगा। जैसे आपके रुकने की खाने पीने की व्यवस्था का खर्चा आदि।

मेडिकल लोन के फायदे ओर नुकसान

medical loan एक तरह का पर्सनल लोन ही होता है। बस अंतर इतना ही होता है कि लोन की राशि सीधे आपके बैंक खाते में नही आती है। बल्कि सीधे अस्पताल को भेज दी जाती है। कुछ बैंक मेडिकल लोन की राशि आपके खातें में भी डाल सकते है। इसलिए आप यह लोन लेने से पहले अपने बैंक में जरूर पता कर ले।

मेडिकल लोन आप तभी ही ले सकते हो, जब आपको उसकी ज़रुरत पड़ें। इसके लिए आपको हर वर्ष प्रीमियम देने की भी आवश्यकता नहीं है। कुछ मामलों में आपको अस्पताल के बिल पर थोड़ा डिस्काउंट भी मिल जाता है। इसमे ब्याज की रेट पर्सनल लोन से कम होती है।

अगर आपको इलाज के खर्चे के लिए पैसे की ज़रुरत हो, तो आप मेडिकल लोन ले सकते हैं।

अब आप खुद अच्छे से समझ गए होंगे कि आपके लिए क्या अच्छा रहेगा। हेल्थ इंश्योरेंस में आपको पहले प्रीमियम चुकाने होंगे। और फिर आपके इलाज का सारा खर्चा इंश्योरेंस कम्पनी उठाएगी। ओर मेडिकल लोन में बैंक आपको लोन की राशि दे देगी। पर उसके बाद वो पूरा पैसा आपको ब्याज के साथ चुकाना होगा।

अब सवाल यह उठता है, की किस पर भरोसा करें, हेल्थ इंश्योरेंस पर या फिर मेडिकल लोन पर?

मेडिकल लोन और हेल्थ इंश्योरेंस में से किसे चुने।

मेरे अनुसार उन दोनों में से आपके लिये हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) लेना एक बेहतर विकल्प होगा क्योंकी अगर आप कई सालों तक क्लेम ने करें, तब आपको महसूस होगा की आपका प्रीमियम बेकार हो गया। ओर आपके दिमाग मे यह भी आएगा की, इससे बेहतर तो यह पैसा कहीं पर निवेश कर दिया होता तो आज कुछ रिटर्न तो मिलता। ओर समय पड़ने पर आप इस पैसे को निकाल कर चिकित्सा पर खर्च भी कर सकते थे।

परन्तु, यहाँ एक समस्या है। आप ऐसा इसलिए सोचोगे क्योकि आपको कभी कोई बीमारी नही हुई, ओर इसी वजह से आप मेडिकल क्लेम नही कर पाये। पर ज़िन्दगी का कोई भरोसा नहीं।

अब आप मां लीजिये की आपने 10 वर्ष तक 20,000 रुपये का प्रीमियम दिया, और 11वें साल आप गम्भीर तोर पर बीमार जो गए, ओर आपका खर्चा 5 लाख रुपये आ रहा है, तब आप हेल्थ insurance कम्पनी को क्लेम कर सकते हो। ऐसी परिस्थिति में आपको अपने 10 वर्षो का प्रीमियम इतना ज्यादा व्यर्थ नही लगेगा।

अगर आप ऐसा सोचो कि प्रीमियम देने की जगह पर यह पैसा निवेश किया होता तो। आप अपने उस पैसे को इस्तेमाल कर सकते थे। परन्तु यह पैसा एक बार खर्च होने के बाद, आपका पैसा खत्म हो जाएगा। पर हेल्थ insurance हर वर्ष रिसेट (reset) हो जाती है| मतलब की आप आगे भविष्य में भी क्लेम कर सकते हो। कई

कई बार ऐसी बीमारी भी हो जाती है, तब आपको बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। और आपका पैसा खर्च होता रहेगा। ऐसी स्थिति में इंश्योरेंस पॉलिसी बहुत ही ज्यादा लाभकारी हो सकती है आपके लिए।

मेडिकल लोन में बैंक से आपको केवल पैसा उधार दिया जाता है। पर आपको यह पैसा ब्याज समेत चुकाना भी होगा। ब्याज की दर ज्यादा भी हो सकती है। ओर साथ ही, इस बात की भी क्या गारंटी है की, आपको मेडिकल मिल ही जाएगा। अगर आपको जरूरत पड़ने पर मेडिकल लोन नहीं मिला तो, तब आप क्या करेंगे? आपका या फिर आपके परिवारजन का इलाज कैसे होगा? अगर कोई ऐसी बीमारी होती है, जहां बार-बार अस्पताल में जाना पड़े या भर्ती होना पड़े, तो कितनी बार लोन लेंगे और कैसे भुगतान करेंगे।

आप इस बात पर ध्यान दें की हेल्थ इंश्योरेंस में आपको केवल प्रीमियम देना होता है। ओर आपके क्लेम का भुगतान बीमा कंपनी करती है, ओर आपका मेडिकल का खर्चा बीमा कम्पनी वहन करती है। और आपको उसे कुछ लौटाना भी नहीं पड़ता है। पर मेडिकल लोन में अगर आपने 5 लाख का लोन लिया, तो आपको 5.5 लाख रुपये लौटाने भी होंगे। इसलिए सोच समझ कर फैसला कीजिये कि आपके लिए क्या सही है। मेडिकल लोन या हेल्थ इंश्योरेंस।

मेरे हिसाब से आपको हेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहिए। और साथ ही आप एक मेडिकल फण्ड (medical fund) भी बनाये। मतलब आप अपनी कमाई में से कुछ पैसा सेव कीजिये और उसे फिक्स्ड डिपॉजिट (fd) या लिक्विड फंड में डाल दीजिए। ताकि जब आपको जरूरत पड़े, तब यह पैसा आपके इमरजेंसी में काम आएगा। क्योकि पूरी तरह से मेडिकल लोन पर भरोसा करना भी एक अच्चा विकल्प नहीं है। इसलिए आप खुद की तरफ से भी तैयार रहे।

Updated: 19/09/2019 — 7:02 am

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